जुदाई

तुम आज आओ ना

तुम आज आओ ना, जैसे हमेशा आते हो| तन्हाई को सजाओ ना, जैसे हमेशा सजाते हो| तुम्हारे बिन भूल रहा हूँ मायने जिन्दिगी के, फिर मुझे याद दिलाओ ना, जैसे हमेशा दिलाते हो| तुम आज आओ ना, जैसे हमेशा आते हो… रूठी नींद करवट लेकर सो गयी है रातों से, मुझे दामन में सुलाओ ना,

शम्मा

शम्मा देर तलक जलती रही| ख़त्म हुई महफ़िल-ए-जीस्त मगर, शम्मा देर तलक जलती रही| सामना हुआ हकीकत से फिर क्यों, आरजू दिल में कोई पलती रही| शम्मा देर तलक जलती रही| मेरा कसूर था या यारों की मोहब्बत, सहर तक मेरे पैमाने में मय डलती रही| शम्मा देर तलक जलती रही| उसके रुखसत से ही

आवाज़ है तेरी

तरसती आँखों को आस है तेरी, भटकती राहों को तलाश है तेरी| सबब-ए-फिराक का इल्म नहीं, कौन सी मजबूरी हमराज़ है तेरी| भटकती राहों को तलाश है तेरी… ना समझ मुकद्दर को खुदा, हर अंजाम की आगाज़ है तेरी| भटकती राहों को तलाश है तेरी… ख्वाबों की कीमत सांसों से देने वाले, जिंदिगी बेंचती है