Tag: मोहब्बत

ऐसा तो नहीं है

ऐसा तो नहीं है के मुझे बुरा नहीं लगता, बस मैं तेरे प्यार में मुंह खुला नहीं रखता| अपना सर झुका देता हूँ उसकी गलतियों पर, मैं देर तलक अपनों को खफ़ा नहीं रखता| मंदिर-मसजिद जाने का मेरा अपना सलीका है, दिल में खुदा रखता हूँ, होटों पर दुआ नहीं रखता| मेरी सबसे बड़ी कमज़ोरी यही

बादल

कहने को चाँद से कब मिला है बादल, देखो तो चाँद से कब जुदा है बादल| जूनून ए इश्क की इन्तहा है बादल, दिल ए आशिक की दुआ है बादल| काली रात में चांदनी का टीका है बादल, अपने चाँद के बगैर कितना फीका है बादल| चाँद के आँचल में लिपटकर रोया है बादल, इतनी

मैं कहीं भी पहुँचा बस बेकार पहुँचा

लौट के उसी दो राहे पर बार-बार पहुँचा, मैं कहीं भी पहुँचा बस बेकार पहुँचा| सारी रात गुज़ार दी चंद लफ़्ज़ों के साथ, मेरे सवाल से पहले उनका इनकार पहुँचा| मैं कहीं भी पहुँचा बस बेकार पहुँचा… रूह की गहराईयों में राह तकती आंखें, जहाँ तू नहीं पहुँचा वहाँ इंतज़ार पहुँचा| मैं कहीं भी पहुँचा

ख्वाब है मगर

ये मोड़ भी आया है इबादत-ए-इश्क में, ख्वाब है मगर उसकी तामीर दुआओं में नहीं| जिंदगी का सबका अपना ही तजुर्बा है, इस को जीने का हुनर किताबों में नहीं| ख्वाब है मगर उसकी तामीर दुआओं में नहीं… तुमने भी महसूस तो की होगी कभी, जो कसक ख़ामोशी में है सदाओं में नहीं| ख्वाब है

खुदसे बेईमान माना

तुम्हारी हर ख्वाहिश को अपना ईमान माना, हमने कई बार खुदको खुदसे बेईमान माना| हम इन दीवारों में एक घर ढूंढते रहे, तुमने जिस पिंजरे को अपना मकान माना| हमने कई बार खुदको खुदसे बेईमान माना… मैं तबाह हुआ तो सफीनो ने सांस ली, इस जुस्तजू से अच्छा मौत का फरमान माना| हमने कई बार

पूरी कहाँ होगी हसरत तुम्हारी

थोड़े और की आरजू तो मरते दम तक रहेगी, चंद ख्वाइशों से पूरी कहां होगी हसरत तुम्हारी| ज़रा सोच समझके ही इल्जाम लगाना मुझ पर, जान ही ना ले जाए मेरी ये फितरत तुम्हारी| चंद ख्वाइशों से पूरी कहां होगी हसरत तुम्हारी… मेरे ख्याल मुझसे पहले तेरे ज़हन में करवट लें, कहीं मुझे रुसवा ना

उसमें खूबसूरत क्या है

तू ही बता तनहाई की सूरत क्या है, किसी को तुझे समझने की ज़रुरत क्या है| हमने तो उस शख्स से मोहब्बत की है, आप उसी से पूछिए उसमें खूबसूरत क्या है|

अगर ऐसा हो जाए

वैसा मगर ना हो तो, अगर ऐसा हो जाए, उसकी नज़र दिल पर हो, दिल नज़र उसके हो जाए| चुभता रहे उम्र भर जिगर को, वो तीर ही क्या जो पार हो जाए| वैसा मगर न हो तो, अगर ऐसा हो जाए.. रूठने मनाने का सिलसिला कब-तलक चल अब बहूत हुआ थोडा प्यार हो जाए|