Tag: मोहब्बत

एक ख्याल

उन लम्हों को फिर जिया जाए आज, चुभा था जिसका कांटा, उस गुल को फिर छुआ जाए आज| अपना मुकद्दर हातों में लिए फिरता हूँ, कुछ तकदीरों का मज़ा भी लिया जाए आज| सूख चली हैं ज़िन्दगी की राहें, वक़्त भर चला ज़ख्म, एक अश्क पलकों में छुपा के, बारिशों का मज़ा लिया जाए आज|

मैं

तन्हा हूँ, अकेला नहीं हूँ मैं| किसी का बहुत प्यारा हूँ, सौतेला नहीं हूँ मैं| किसी की आँखों का नूर हूँ, किसी की जिंदिगी का सुरूर हूँ| खुद बेबस हूँ तो क्या, किसी की मजबूरी नहीं हूँ मैं| वक़्त के सितम, जज्बातों ने सहे, भीगती पलकों ने, कितने अफ़साने कहे| गम के समंदर में हूँ,

क्या था… क्या ना था

चली थी मुझ तक, यूँ तो कुछ तेज हवाएं, पर उस ज़र्रे को मेरा दामन, गवारा नहीं था| सदाओं पे एक अजनबी ने पलट कर देखा, जिसे हमने तो कभी पुकारा भी नहीं था| उसकी आवाज़ की लर्ज़िश बता रही है, वो जो अपना था, अब हमारा नहीं था| जिस शक्स को अपने सहारा दिया,