Tag: परछाइयाँ

एक आईना जो बोलता है

घर के एक कोने में बैठा, निगाहों में वही तीर लिए, यार जो यारी तोलता है, एक आईना जो बोलता है| हर दिन मैं बदल गया, हर हाल में वो ढल गया| वो खुदा की तरह बुलंद है, न हँसता है, न रोता है, एक आईना जो बोलता है| मेरे उसूल खोखले हो गए, सपनों

मन करता है

दिल कुछ भारी सा है, आज रोने का मन करता है| कुछ उदासी है ज़हन में, देर तलक सोने का मन करता है| ये बंदिशे तोड़ के ज़माने की, आज उड़ने का मन करता है| दिन बीत रहा है हर रोज़ की तरह, आज कहीं खोने का मन करता है| दूरियाँ और भी बढा दी