शराब

इंतज़ाम

मयखानों में शराबों का इंतज़ाम किजीये, हम पढ़ने आये हैं, आँखों का इंतज़ाम किजीये| मुझे ढूंढ रहा है मेरा माज़ी गलियों गलियों, ए मेरी हसरत ओ तमन्ना.. ठिकानों का इंतज़ाम किजीये| हम पढ़ने आये हैं, आँखों का इंतज़ाम किजीये… ये नींद एक रात की नहीं.. सदीयों की है, कब्र में जा रहा हूँ… ख़्वाबों का

हिसाब की पीते हैं

हिसाब की पीते हैं जब-तलक होश रहता है, वो कोई और है, जो सर-ए-महफ़िल बेहोश रहता है| ए साकी तेरे इस जाम का हक भी अदा कर दूँगा, रात अभी बाकी है, क्यों मुझे एहसान फरामोश कहता है| तू भी कभी मेरे साथ पीकर देख रकीब, तुझे भी समझ में आये, इश्क क्यों खामोश रहता है| आप इस