त्यौहार

हमारे कस्बों की बात ही निराली है

चमकते शहर की सीरत ही काली है, हमारे कस्बों की बात ही निराली है| दीवाने से हम उलझ गए रौशनी से, परवानों से हमने जिंदगी हारी है| हमारे कस्बों की बात ही निराली है… उन दीयों की लौ का नूर है आँखों में, हमारे घरों में आज दिवाली है| हमारे कस्बों की बात ही निराली

एक दिवाली तुम मना लेना

एक दिवाली तुम मना लेना, एक दिवाली मैं मना लूँगा| लौट कर ना ये रात आये, लबों पर ना ये बात आये, एक दामन तुम भीगा लेना, एक दामन मैं जला लूँगा| एक दिवाली तुम मना लेना, एक दिवाली मैं मना लूँगा… इस मातम का सबब नहीं है, क्यों जिंदिगी का अदब नहीं है, एक