Tag: यादें

बात निकली

कहते कहते जब बात निकली, करहा के हमसे आह निकली| बंद ताले जब खोले हमने, गुजरी हुई हर साँस निकली| देखते देखते सहर हो गयी, आँखों आँखों में रात निकली| बंदगी की बाज़ी जीत तो गया, इसमें खुदी की मात निकली| कहाँ है तू मेरी हमनफस बता, कहने को तो तू मेरे साथ निकली| इसे

नम आँखों से गुज़र जायेगी

सूखे पत्तों सी आई है याद, नम आँखों से गुज़र जायेगी| यूँ तो ख़ामोशी है इनकी अदा, बहते बहते ये कहानी बन जायेगी| नम आँखों से गुज़र जायेगी| खलिश है बीते कल की ये, वरना बीती रुत कब आयेगी| नम आँखों से गुज़र जायेगी| सदमों से खत्म नहीं होती जिंदिगी, संभालते संभालते संभल जायेगी| नम

वक़्त का कतरा

अब थमता हूँ, तब थमता हूँ, तुम्हारी याद आती है, वक़्त का कतरा जब थामता हूँ| भुला देता है सब जो एक पल में, उस शख्स का पता नहीं जानता हूँ.. तुम्हारी याद आती है, वक़्त का कतरा जब थामता हूँ| किसी का शौक़ है, किसी की दिल्लगी, में तो मोहब्बत को रब मानता हूँ..

खोया मौसम

खुद से जब मैं सच्चा था, दुनिया की नज़र में बच्चा था| हासिल नहीं था बहोत ज़िन्दगी से, थोडा बहुत था, अच्छा था| खुद से जब मैं सच्चा था| गम सजाना बचपन से अदा थी, अक्लमंदों की समझ में, कच्चा था| खुद से जब मैं सच्चा था| हौसले बुलंद हुआ करते थे, इरादों का पक्का

याद है मुझको

छत पे सितारों की आराईश, याद है मुझको, सूखे फर्श पे, यादों की बारिश, याद है मुझको| हातों पे बिखरी लकीरों का सबब मुझको नहीं, मुक्कदर की वो हसीन साज़िश, याद है मुझको| दीवारों पे लटके ख्वाबों पे गर्द है लेकिन, दिल की हर ख्वाइश, याद है मुझको| यूँ तो ज़ीस्त से कोई मरासिम नहीं