Tag: जिंदगी

आदमी

है कोई पुरजे सा आदमी, है ना! घूमता हर लम्हा आदमी, है ना! थक के रुकना उसको गवारा नहीं, बड़ता हर लम्हा आदमी, है ना! अपनी तलाश से वो मायूस नहीं, ढूँढता हर लम्हा आदमी, है ना! अपनी खुदी का सुरूर है उसको, झूमता हर लम्हा आदमी, है ना!

दोस्तों

कहना है तो आवारा मुझे कहो दोस्तों, आओ मेरे साथ थोडा और बहो दोस्तों| दोस्ती की है तो संभालो गिरते हुए, बस देखते ना मुझे रहो दोस्तों| मेरी फितरत तुम्हे ना लग जाए कहीं, तुम भी ना लम्हा लम्हा मरो दोस्तों| है इसकी अदा हमें तड़पाने की, हौले हौले गम सहो दोस्तों| क्या सब लाचार

मैं इनका खुदा हूँ

ये सब जो भागता है नज़रों में.. ये चेहरे जो बार बार देखते हैं मेरी तरफ.. ये रिश्ते जो अक्सर बांधते हैं मुझे अपने दामन से.. ये ख्याल जो मुझे अक्सर मायूस करते हैं… ये लफ्ज़ जो भटकते है अनाथ बच्चों से.. ये इश्क जो मुझे दीवाना बनाता है.. ये बंदगी जो मुझे खोकला करती

मौत का इंतज़ार

घिस घिस के हाथ लहू हुआ, लकीरें मिट जाती क्यों नहीं| सांसों ने बांधा है मुझे इनसे, एक बार रूठ के जाती क्यों नहीं| रूठी जिंदिगी को मनाया हमने बहुत, कभी ये हमें मनाती क्यों नहीं| है खंजर तेरा मेरे गले पर, हलक मुझे क्यों कर डालती नहीं| मुन्तज़िर अपनी मौत का क्यों रहे वीर,

चेहरे चेहरे

कितने रंग हैं चेहरे चेहरे| हर चेहरे पर पहरे पहरे| कोई ताज़ा ज़ख्म है मिला, अश्क अब तलक हैं ठहरे ठहरे| बहुत सहा है उसने ‘वीर’, देख निशां हैं गहरे गहरे|

रुक जा यहाँ

रुक रुक, थोडा रुक जा यहाँ| ये वक्त नहीं अब आने का| देख देख, सब देख ले यहाँ| देख ले रंग ज़माने का| लड़ लड़, लड़ले सबसे तू, असर क्या है आग लगाने का| सीख सीख, सीख ले गुलों से, राज़ हँसते हुए मुरझाने का| डूब डूब, डूब जा मय में, ज़रिया है सब भूल

के मैं रास्तों का ही हो गया

चलता गया यूं रास्तों पर उम्र भर, के मैं रास्तों का ही हो गया| कोई नहीं आता है लौट के वहाँ से, अब जो मैं गया तो गया| के मैं रास्तों का ही हो गया.. मोहब्बत थी कहीं दफन उसमे, दो आंसू मेरी मज़ार पर रो गया| के मैं रास्तों का ही हो गया.. तुम

फिर भी हम चलते रहे

ग़मों के कांटे चुभते रहे, फिर भी हम चलते रहे| मिलते रहे सभी से मगर, अपने दायरों में सिमटते रहे| फिर भी हम चलते रहे … मुरझाये से रहे उम्र भर, आरजू के गुल महकते रहे| फिर भी हम चलते रहे … फिर मिले बिना शर्त प्यार, बच्चों से हम मचलते रहे| फिर भी हम

आज कल

ख़ामोशी है हमराह आज कल, आवारगी है गुमराह आज कल| फिर आया गिले हज़ार लेके, वक्त की यही है चाल आज कल| और कौन सा रंग है अनदेखा, बस यही है सवाल आज कल| एक नया सितारा है आसमां में, उसी का है बवाल आज कल| बेठे रहें तुझे आँखों में सजाये, हसीं है फ़िराक

लहरों में बहने वाले

लहरों में बहने वाले, खुद में गुम जाने वाले| तेरी ख़ामोशी को समझते कैसे, हम शोरों में रहने वाले| तुझे वास्ता नहीं दुनिया से, अपनी दुनिया में जीने वाले|